बे-तख़ल्लुस

manu

manu

Sunday, November 30, 2008

आख़िर शाम को मैंने अपना वोट दे ही दिया.....एक स्याही आज अपनी भी ऊंगलियों को छू गयी............................
मेरे वाला आए ...तेरे वाला आए .......................................................................................................
पर ऐसा कोई ना आए .....जैसे के आते रहे है...................

1 comment:

रज़िया "राज़" said...

पर ऐसा कोई ना आए .....जैसे के आते रहे है...................हमारी भावनाओं से खेलने वाले।ग़रीबों के मुँह का नीवाला छीननेवाले,