बे-तख़ल्लुस

manu

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Tuesday, September 21, 2010

एक पुराना शे'र याद आ गया..
मेट्रो में ही हुआ था कभी....




जब कि ज़ाहिर है तेरी हरकत से तेरी कैफियत
क्या जरूरी है बता, फिर फुसफुसाना कान में ...

22 comments:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

वाह मनु जी...
एक शेर में कितना कुछ कह गए आप.

ZEAL said...

wow !..great lines !

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

ali said...

चिंतनपरक !

बेचैन आत्मा said...

वाह!

MUFLIS said...

दिल के रस्ते ही से होगा, जिनका जाना, कान में
लफ्ज़, खुद चाहेंगे फिर वो , गुनगुनाना, कान में
सब पे ज़ाहिर हो गया सब,सब को सब कुछ है पता
उफ़, तेरा वो राज़ की बातें बताना कान में

"अर्श" said...

is she'r ko pahchanta hun .... jab ye ban rahaa tha main samajh sakta hun... aur aapne saari ghatanaa sunai thi mujhe iske banane ki....


:)

arsh

neelam said...

एक बात बताईये मनु जी

जब कि जाहिर है तेरी कैफियत से तेरी हरक़त
क्या जरूरी है सुनना फिर फुसफुसाना उनके कान का

बहरो -वजन तो खुद ठीक करिए ...............आपकी आँखों काt.v हर समय इतना मुस्तैद क्यूँ रहता है मनु जी ,कभी कभी मेट्रो में सो भी जाया करिए ..................

ZEAL said...

waise fusfusane ka apna ek alag hi maza hai..

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...

जनाब... बहुत पैनी नज़र है आपकी !

boletobindas said...

मेरी एक पोस्ट पर आपने कहा था कि कविता की समझ नहीं, खुद चंद शब्दों में बातों को समटने का हुनर कहां से सीखा फिर। सुभानअल्लाह इस शेर पर....

boletobindas said...

मेट्रो में जो देखा उसने इतने शब्दों में व्यक्त किया कि पूछिए नहीं, या शायद इतने नजारे देखे....जो मेट्रो कविता में डाल दिए और आपने चंद शब्द में........वाह

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह, क्या बात है...

rohit said...

sirf sher nahi bandhu, aaka tajhurba hai.

mera geet pasand kita ,dhanywad

rohit g.r.
rohitkalyaan@gmail.com
09425871600/09329895666

rohit said...

sirf sher nahi bandhu, aaka tajhurba hai.

mera geet pasand kita ,dhanywad

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rohitkalyaan@gmail.com
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rohit said...

sirf sher nahi bandhu, aaka tajhurba hai.

mera geet pasand kita ,dhanywad

rohit g.r.
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09425871600/09329895666

मनोज भारती said...

हालत हरकत को बयां कर रही
फुसफुसाहट ...

बहुत खूब कहा मनु दा !!!

ZEAL said...

koi nayi ghazal Manu ji ?

हरकीरत ' हीर' said...

कौन थी वो फुसफुसाने वाली ......?
किसी की कैफियत को यूँ भी न निहारा कीजिये .....

उधर चर्चा चलता रहा , इधर राज़ खुलते रहे
बता, अब क्या बताना क्या सुनाना कान में ...?

Mrs. Asha Joglekar said...

kya bat hai, aapka to ek hee sher kitana kuch keh gaya.

उस्ताद जी said...

पिछली कई पोस्ट पढ़ डालीं
आपके लेखन में बहुत जान नजर आ रही है
क्यों न एक नयी पोस्ट हो जाए ?
फिर आता हूँ मैं फिल्टर लेकर.
याद रहे हर पोस्ट एक नया इम्तिहान है. पिछला रिकार्ड काम न आएगा :))

डॉ. नूतन - नीति said...

vaah kya baat hai manu ji.. bahut khoob..