बे-तख़ल्लुस

manu

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Sunday, September 15, 2013

कल जब अस्पताल में हम वेटिंग-लिस्ट में थे तो एक हाल नजर आया जहां हिंदी में योग और इंग्लिश में YOGA लिखा था, मैं उत्सुकतावश उधर को चल पडा पत्नी के साथ, उधर एक सांवली सलोनी ममतामयी महिला बैठी हुई थी, मैंने झुककर अभिवादन किया और पूछा कि क्या आप योगा-टीचर हैं ? उन्होंने मुस्कुराकर कहा कि हूँ तो , पर अभी खुद एक थेरेपी के लिए आई हुई हूँ सो आपको कुछ बताउंगी नहीं। 
मैंने कहा के थोड़ी दुविधा में हूँ ,बस इतना भर पूछना है कुछ समय से मेरी वाइफ़ के दाहिने घुटने में दर्द है, एलोपैथी में इन्हें बताया है कि चौकड़ी (पालथी) मारकर हरगिज़ ना बैठें, कम से कम आप इतना स्पष्ट कर दीजिये कि यदि पालथी भी मार के न बैठें तो और कैसे बैठें ?

उन्होंने तत्काल अपने बैठने की मुद्रा बदली और सहजता से पालथी मारते हुए कहा कि इन्हें बस पद्मासन नहीं लगाना है और जबरन पालथी नहीं मारनी है। यदि इन्हें सुखासन में बैठने की आदत है और ये बिना तकलीफ के बैठ सकती हैं तो इन्हें बिलकुल बैठने दीजिये चौकड़ी में , जब उकता जाएँ तो पोजीशन बदल सकती हैं।   

मैंने उनके सजेशन को बिना टैग हुए लाइक  किया  और मन की गहराइयों से धन्यवाद कहते हुए चलने लगा तो हाल में एक युवक ने प्रवेश किया जिसे देखते ही उन मैडम जी ने हम मियाँ-बीवी को रोक लिया और कहा " ठहरिये, गुरु जी आ गए हैं । ये आपको ज्यादा सही समझा सकेंगे। 

पत्नी उनके कहने पर,और मैं पत्नी के कहने पर रुक तो गए किन्तु इन नए योग-गुरु से कुछ और जानने का जाने क्यूँ मन नहीं था । शायद हमें भांपकर या यूं ही उस महिला ने उस आगंतुक युवक से पूछा " गुरु जी, इनका एक प्रश्न है ।" 
युवक का उत्तर था "ये जगह बहुत कंजेसटड  इधर कोई क्लास पॉसिबल नहीं है, परसों सुबह आठ बजे दस नम्बर में आने को बोलिए , कुछ हल्का नाश्ता लेकर आयें "

महिला ने फिर कहा कि इन्हें कोई क्लास नहीं करवानी है , इनका एक प्रश्न है केवल । 

गुरु जी :- ''मैंने कहा न की ये बहुत कंजेसटड है, इधर कोई भी बात नहीं हो सकती ''
महिला :-'' गुरु जी, एक बार सुनिए तो प्लीज़, इन्हें गलत गाइड किया गया है ''
लगभग चीखते/खीजते गुरु जी :-'' मैंने कहा न कि  इधर बहुत कंजेसटड है , इधर कोई बात हो ही नहीं सकता है "
मैं लम्बे चौड़े हाल में हम चार लोगों को निहारते हुए निकला ही रहा था कि ममतामयी महिला ने हमें एक बार फिर ठहरने का इशारा करते हुए युवक से फिर गुहार लगाई :- ''गुरु जी सुनिए तो , इन्हें किसी डॉक्टर ने क्या सलाह दी है '' 
अब गुरु जी सीधे पलटकर मेरी और आये और आँखों को तरेरने से बचाते हुए हाथ जोड़ कर बोले "आपने जो भी कहना/पूछना है परसों मंडे को दस नम्बर में आठ बजे आइये …. प्लीज़  …. 
और हाँ  …  कुछ हल्का नाश्ता जरूर करके आइयेगा 


मैं उन्हें मजबूरन थैंक यूं कह के जब चला तो गुरु जी ने फिर  कहा " कुछ हल्का फुल्का सा खाकर जरूर आना "










2 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जिस व्यक्ति को अपने क्रोध पर नियंत्रण न हो, दूसरे की बात सुनना ही नहीं चाहता हो वह योग कैसे सिखा सकता है!

प्रेम सरोवर said...

प्रस्तुति प्रशमसनीय है। मेरे नरे नए पोस्ट सपनों की भी उम्र होती है, पर आपका इंजार रहेगा। धन्यवाद।