बे-तख़ल्लुस

manu

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Tuesday, March 24, 2009

GHAZAL,,,


कड़कती धूप को सुबहे-चमन लिखा होगा

फ़रेब खा के सुहाना सुखन लिखा होगा


कटे यूँ होंगे शबे-हिज़्र में पहाड़ से पल

ख़ुद को शीरी औ मुझे कोहकन लिखा होगा


लगे उतरने सितारे फलक से उसने ज़रूर

बाम को अपनी कुआरा गगन लिखा होगा


शौके-परवाज़ को किस रंग में ढाला होगा

कफ़स को तो चलो सब्ज़ा-चमन लिखा होगा


हर इक किताब के आख़िर सफे के पिछली तरफ़

मुझी को रूह, मुझी को बदन लिखा होगा


ये ख़त आख़िर का मुझे उसने अपनी गुरबत को

सुनहरी कब्र में करके दफ़न लिखा होगा |

23 comments:

नीरज गोस्वामी said...

मुश्किल काफिया बड़े हुनर से निभा ले गए हैं आप....वाह.
नीरज

"अर्श" said...

किसी अमीर की महफ़िल का ज़िक्र क्या है अमीर, खुदा के घर भी न जाऊँगा बिन बुलाए हुए...

aapke is gazal ka kya kahana,kis she'r ki taarif karun aur kiska dil dukhaun... mere se ye paap nahi hota...jabki baat ye hai ke har she'r ek pe ek hai... kamaal ka likha hai aapne... bahot khub... dhero badhaaee..


arsh

Vijay Kumar Sappatti said...

manu ji

kya kahne , waah ji waah
हर इक किताब के आख़िर सफे के पिछली तरफ़
मुझी को रूह, मुझी को बदन लिखा होगा

ये ख़त आख़िर का मुझे उसने अपनी गुरबत को
सुनहरी कब्र में करके दफ़न लिखा होगा |

dil chher kar rakh diya huzoor ... waah , maza aa gaya . saamne hote to ,"cheers" to kar hi leta aur un haatho ko choom leta ,jinhone ye sher likha hai ..

maza aa gaya sir ji ....
isi baat par meri agli kavita aapke naam par !!!

दिगम्बर नासवा said...

कड़कती धूप को सुबहे-चमन लिखा होगा
फ़रेब खा के सुहाना सुखन लिखा होगा

खूबसूरत ग़ज़ल, बेहतरीन शेर..........नया पन लिए, नए मतलब लिए ग़ज़ल

दर्पण साह 'दर्शन' said...

.....................

Speech less...
hamesha ki tarah !!
Aaj phir 4 logon e haar gaya...
:(

par pehli baar haarna accha laga...

तेरी नज़्म में डूब गया हूँ आज फिर,
लिखा होगा, पर कहाँ ऐसा 'दर्शन ' लिखा होगा ?

behar pe bilkul dhyaan mat dein manu ji plzz...
kewlal bhav dekhien jo apke liye aaye hain....(apne hi kaha tha jaan ke galti karna, koi galti nahi.)

:)

manu said...

darpan ji,,,,
poori bahar mein to shaayad main bhi nahin hoon,,,
to abhi kyaa kahoon,,,
kabhi likhi thi,,,aaj post kar di,,

अल्पना वर्मा said...

हर इक किताब के आख़िर सफे के पिछली तरफ़
मुझी को रूह, मुझी को बदन लिखा होगा

कटे यूँ होंगे शबे-हिज़्र में पहाड़ से पल
ख़ुद को शीरी औ मुझे कोहकन लिखा होगा

वाह !वाह !वाह!
मनु जी यह सभी बहुत ही उम्दा शेर हैं!

उम्दा ग़ज़ल!

इतनी अच्छी ग़ज़ल पढ़वाने के लिए धन्यवाद.

दर्पण साह 'दर्शन' said...

vaaps aaya, teesri baar....
kai baar hota hai pet bhar jaat hai aankhein nahi...
हर इक किताब के आख़िर सफे के पिछली तरफ़
मुझी को रूह, मुझी को बदन लिखा होगा
wah wah !!

M.A.Sharma "सेहर" said...

मनु जी

ऐसी उम्दा ग़ज़ल आप कैसे निभा जातें हैं ?
किसी एक शेर विशेष के बारे में लिखना चाह रही हूँ..पर नहीं कर सकी

बहुत खूब

सादर !!!

Harkirat Haqeer said...

Bhot der tak lafzon ka arth dhoondhti rahi...gazal to bemisal hai uski tarif karne fir aaungi.... par arth kuch jane pehchane se lage...ek bar fir padh lun...!!

Harkirat Haqeer said...

मनु जी हर शेर लाजवाब है किसकी तारीफ करूँ और किसकी न करूँ....

शौके- परवाज़ को किस रंग में ढाला होगा
कफस को तो चलो सब्ज़ा चमन लिखा होगा

वाह वाह.....!!

हर इक किताब के आख़िर सफे के पिछली तरफ़
मुझी को रूह, मुझी को बदन लिखा होगा

बेहतरीन...बहुत ही उम्दा ...!!

ये ख़त आख़िर का मुझे उसने अपनी गुरबत को
सुनहरी कब्र में करके दफ़न लिखा होगा

अब इस शेर में तो मुफ़लिश जी ज़रूरत है दाद देने के लिए....आइए हुज़ूर....!!|

गौतम राजरिशी said...

मनु जी को सलाम...नयी जगह से

मेट्रो, हैंड-शेक, स्केच, कुछ पन्ने, मैम के हाथों की चाय, सीढ़ियां, कैन्वास, पेंटिग्स चंद, ग़ालिब, ग़ज़ल के बहाने, सारे सुख़न हमारे, और अल्फ़ाज़ सारे....
इन्हीं में उलझा हूँ अभी तो गज़ल बाद में आ कर देखता हूँ

manu said...

shukra hai,,,
aap nazar to aaye,,,,,
par ye switch off kyoon,,,,,,,??

aur itne kam time ke liye milne ki shikaayat chaay waali ke sahit sab ko hai,,,
darpan ji to bas,,,,,

गौतम राजरिशी said...

लीजिये फिर से आ गया मनु जी....सुबह ही तो बात हुई थी और उस वक्त यहाँ बारिश हो रही थी ठंढ़ और बढ़ाती हुई कि अब कटे हैं यूँ शबे-हिज़्र में पहाड़ से पल, किंतु कौन शीरी किसे कोहकन लिखेगा...????
पाचवाँ शेर कयामत वाला है कि पढ़ कर कत्ल हो जाने को जी चाहे बा-खुशी.....

MUFLIS said...

"कड़कती धुप को सुबह चमन लिखा होगा
फरेब खा के सुहाना सुखन लिखा होगा..."

बहुत अछा मतला है .....
kaheeN kaheeN sudhaar ki gunjaaeesh hai...jaise

लगे उतरने .....
(दरीचा) अपना कुंवारा gagan...... yahaaN (baam) ki jagah nahi hai

wo aakhir wala sher..aise koshish kareiN
छिपा के अपनी वो गुरबत, ख़त आखिरी उसने
सुनहरी कब्र से लेकर थकन (जलन) लिखा होगा
क्योंकि lafz 'दफ्न' hai 'dafan' nahi

कटे यूं होंगे ......
(कि) खुद को शीरीं , मुझे कोहकन लिखा होगा
"खुद" पहले नहीं आ पायेगा ...इसलिए ऐसे करना पड़ेगा

और अब शौके परवाज़ ......
या तो ये बनता है
ढला तो होगा वो parvaze shauq mei अपने
(ye to hua khwaahish ki udaan)
YA

दिया तो होगा कोई रंग शौके paiham (nisbat) (gulshan) को
चलो ! qafas को तो sabza-chaman लिखा होगा ...jahaaN aapne chalo likha hai
wahaaN kuchh janchtaa nahi

sandesh लिखने या parhne mei अगर कोई mistake लगे
या मैं ही कोई sher समझ न paya हूँ तो
बात kee jaaegi .......
GOD BLESS.
---MUFLIS---

अमिताभ श्रीवास्तव said...

manuji
bahut dino baad aayaa hu, is beech aapne bhi mere blog ki aour dekha nahi..kher..
ab itne behtreen logo ne aapki gazal ke baare me likha he ki mujh jesa kuchh soch kar bhi nahi likh sakta..
likhunga jaroor par itna hi ki-
B E H T R E E N

sandhyagupta said...

Bahut khub likha hai.Yun hi likhte rahiye.

SagarSialkoti said...

kcbhagat
app ki gazal achi lagi

Poonam Agrawal said...

Bus itna hi kahungi .....BAHUT KHOOB...

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

खुदा ने खुद को उतारा ज़मीं पे बेबस हो.
लिखा 'मनु' का कोई शे'र जब पढ़ा होगा.

Babli said...

पहले तो मै आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हू कि आपको मेरा ब्लोग पसन्द आया ! मै तरह तरह के खाने बनाने की शौकिन रखती हू ! ये दाल कबाब खास बन्गाली खाना है और मै उम्मीद करती हू कि आप जब इसे खायेगे तब आप को बेहद पसन्द आयेगा और इसका लुत्फ़ ज़रूर उठायेगे!
बहुत ही खुबसूरत लिखा है आपने !

indu puri said...

कटे यूँ होंगे शबे-हिज़्र में पहाड़ से पल
ख़ुद को शीरी औ मुझे कोहकन लिखा होगा

ये ख़त आख़िर का मुझे उसने अपनी गुरबत को
सुनहरी कब्र में करके दफ़न लिखा होगा |


सामने होते तों कई बार सुनाने कि गुजारिश करती 'ये' दो शे'र .
इन्हें अपनी आवाज में रिकोर्ड करके पोस्ट क्यों नही करते जैसे समीरजी(दादा),अदाजी,अल्पनाजी करती हैं .आप भी करिये प्लीज़.
कुछ शब्द कठीन है उनका अर्थ भी साथ दे दिया करें .
प्यार और-
'तेरे कलम की उमर दराज़ हो'

manu said...

इंदु मैडम..
नमस्कार...

आप ने जिन महान हस्तियों का ज़िक्र किया है....उनकी तरह पोस्ट कि हम सपने में भी नहीं सोच सकते....
ये सब लोग ब्लॉग-जगत के स्वर सम्राट हैं...
और हम...

हम इस जगत के सबसे बेसुरे इन्सान,,,,,

:(